रविवार, 21 अगस्त 2016

P K GURUJee 5


बात 13 अगस्त 2016 की है :-
मैं अपने एक अजीज दोस्त से मिलने उसके यहाँ जा रहा था,
बरसात का मौसम होने के कारण मैने बस से जाना उचित समझा
रास्ते में मैने देखा की बस कंडक्टर छोटे छोटे बच्चों से किराये का  1-1 Rs ले रहा है और बच्चे भी बडे आराम से कंडक्टर को रुपये दे रहे थे
आगे चलकर बच्चे अपने अपने स्टोप पर उतर गये......
रास्ते में मैने कंडक्टर से पुछा की आप इन छोटे छोटे बच्चों से 1-1 Rs लेते हो, क्या इन बच्चों को फ्री नहीं ला सकते क्या ????
आपकी बस में इतनी सवारी बैठती हैं इन बच्चों से ना लोगे तो नही चलेगा क्या ????
कंडक्टर ने बडा ही सुंदर जबाब दिया :-
कि मैं इन बच्चों को फ्री भी ला सकता हुँ और अगर इन बच्चों से किराया ना भी लूँ तो भी चलेगा , लेकिन इनकी आदतें किराया ना देने की हो जायेन्गी जब ये बच्चे बडे हो जायेन्गे , फ़िर ये किराया देने में आना कानी करेंगे ! लडेगें ! झगडेगें!
इसीलिए अभी से ये आदत डाल रहे हैं
@@@@@@@@
कंडक्टर की बात मुझे बहुत ही अच्छी लगी , अगर आपको भी लगी हो तो SHARE करें !

पी के गुरूजी

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